पटना। बिहार सरकार ने राज्य के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों में संविदा के आधार पर कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों और रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट के मासिक मानदेय में संशोधन करते हुए नई दरें निर्धारित की हैं। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, संशोधित मानदेय 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा।
संविदा प्राध्यापकों का मानदेय 2.07 लाख प्रतिमाह
स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार, संविदा पर कार्यरत प्राध्यापकों का मानदेय 1.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.07 लाख रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसी तरह सह-प्राध्यापकों को अब 1.35 लाख रुपये के स्थान पर 1.55 लाख रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। सहायक प्राध्यापकों का मानदेय भी 1.10 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है।
सीनियर और जूनियर रेजिडेंट के मानदेय में भी वृद्धि
सरकार ने सीनियर रेजिडेंट एवं ट्यूटर के मानदेय में भी संशोधन किया है। अब इन्हें 1.15 लाख रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। वहीं, जूनियर रेजिडेंट का मासिक मानदेय 65 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया है।
जानिए किसे कितना मिलेगा मानदेय
| पद | पुराना मानदेय | नया मानदेय |
|---|---|---|
| प्राध्यापक | ₹1,80,000 | ₹2,07,000 |
| सह-प्राध्यापक | ₹1,35,000 | ₹1,55,000 |
| सहायक प्राध्यापक | ₹1,10,000 | ₹1,25,000 |
| सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर | — | ₹1,15,000 |
| जूनियर रेजिडेंट | ₹65,000 | ₹75,000 |
1 सितंबर 2026 से लागू होंगी नई दरें
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, संशोधित मानदेय की दरें 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होंगी। इस प्रस्ताव को प्राधिकृत समिति की अनुशंसा और सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। विभाग ने नई दरों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए संबंधित चिकित्सा संस्थानों को दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने क्या कहा?
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में संविदा पर कार्यरत प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक और रेजिडेंट डॉक्टर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि इन चिकित्सा कर्मियों के योगदान को देखते हुए मानदेय बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इससे उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा और राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में विशेषज्ञ एवं योग्य मानव संसाधन की उपलब्धता को मजबूती मिलेगी।
सरकार के इस फैसले से बिहार के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों में संविदा पर कार्यरत संबंधित चिकित्सा शिक्षकों और रेजिडेंट डॉक्टरों को लाभ मिलेगा।
