नई दिल्ली/ रायपुर। Supreme court latest decision. कानून की पढ़ाई करने का सपना देख रहे युवाओं और अधिक उम्र के अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तीन वर्षीय और पांच वर्षीय LL.B. पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से अब उम्र की बाध्यता के बिना अभ्यर्थियों के लिए कानून की पढ़ाई का रास्ता खुल गया है।
सुप्रीम कोर्ट में BCI ने दी जानकारी
6 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से पेश वकील राधिका गौतम ने बताया कि BCI की जनरल काउंसिल ने कानून पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने BCI के इस फैसले को संज्ञान में लिया। इसके बाद अदालत ने आयु सीमा को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया।
पहले कितनी थी अधिकतम आयु सीमा?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के वर्ष 2016 के सर्कुलर के तहत कानून पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम उम्र निर्धारित की गई थी। इसके अनुसार पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड LL.B. कोर्स में सामान्य वर्ग के लिए 20 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 22 वर्ष की सीमा का प्रावधान था। वहीं तीन वर्षीय LL.B. कोर्स के लिए 30 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा निर्धारित थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2017 में इन आयु प्रतिबंधों पर रोक लगा दी थी।
किस याचिका पर हुई सुनवाई?
यह मामला ऋषभ दुग्गल की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। याचिका में BCI के वर्ष 2016 के सर्कुलर को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि कानून की पढ़ाई के लिए अधिकतम आयु सीमा निर्धारित करना योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों को प्रभावित करता है।
अब BCI की जनरल काउंसिल द्वारा आयु प्रतिबंध वापस लेने के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को निपटा दिया है।
अब अधिक उम्र के अभ्यर्थियों को भी मिलेगा मौका
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जो किसी कारणवश कम उम्र में कानून की पढ़ाई नहीं कर पाए थे। अब तीन वर्षीय और पांच वर्षीय LL.B. पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम उम्र की बाध्यता समाप्त होने से अलग-अलग आयु वर्ग के अभ्यर्थियों को कानूनी शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा।
छत्तीसगढ़ के अधिवक्ता निर्णय को किया स्वागत
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता भगवानू नायक ने LL.B. (विधि स्नातक) की शिक्षा ग्रहण करने के लिए अधिकतम आयु सीमा की बाध्यता समाप्त करने के बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इस फैसले को देश में विधिक शिक्षा के विस्तार, समान अवसर और संवैधानिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
