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रायपुर : कोरबा विकासखण्ड के दूरस्थ, पहाड़ी और जंगलों की गोद में बसे जामभाठा, सोनारी और आसपास के छोटे-छोटे पारा-टोले, जहाँ वर्षों से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और पंडो परिवार निवास करते आ रहे थे। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र जितना सुंदर था, उतना ही कठिन भी। गाँव तक आने-जाने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं थी। लोग पथरीली और ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों से गुजरते थे। बारिश के दिनों में कीचड़ और फिसलन से रास्ता और भी खतरनाक हो जाता था। बीमार को अस्पताल ले जाना हो, किसी बुजुर्ग को बाहर ले जाना हो या बच्चों की पढ़ाई, हर कदम संघर्ष से भरा हुआ था। ग्राम देवपहरी मुख्य मार्ग से भीतर के इन गाँवों तक पहुँचना कई बार ऐसा लगता था जैसे दुनिया से कटकर एक अलग पहाड़ी द्वीप में प्रवेश कर रहे हों। लोगों को राशन लाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था और फिर सिर पर बोरा रखकर उसी कच्चे, पथरीले रास्ते से लौटना पड़ता था। बरसात में तो कोई वाहन आने को तैयार ही नहीं होता था, जिससे गाँव का संपर्क लगभग टूट जाता था।

इसी कठिन जीवन के बीच आशा की किरण तब दिखाई दी जब देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए पीएम जनमन योजना की शुरुआत की। प्रधानमंत्री की पहल के पष्चात मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देषन में इस योजना के अंतर्गत जामभाठा, सोनारी और आसपास के टोला-पारा तक पक्की सड़क पहुँचाने का निर्णय लिया गया। लगभग 3.60 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पहाड़ी और पथरीले भू-भाग पर एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन संकल्प और प्रयासों ने इसे संभव बना दिया। धीरे-धीरे पहाड़ों को चीरती हुई नई सड़क गाँव तक पहुँच गई।

सड़क बनते ही यहाँ के लोगों के जीवन में एक नया अध्याय शुरू हुआ।