बिहार

One Stop Centre: बिहार में जल्द बनेंगे 26 नए वन स्टॉप सेंटर – 23 हजार से अधिक मामले हो चुके हैं दर्ज, लगभग 20 हजार मामलों का हुआ सफल निष्पादन

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पटना । किसी तरह की हिंसा से पीड़ित महिलाओं को तुरंत प्रभावी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार वन स्टॉप केंद्र नेटवर्क का विस्तार कर रही है। समाज कल्याण विभाग के महिला एवं बाल विकास निगम के स्तर से राज्यभर में 26 नए वन स्टॉप सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। इन्हें जल्द पूरा कर लिया जाएगा। वर्तमान में राज्यभर में 39 ऐसे केंद्र चल रहे हैं। नए केंद्रों को मिलाकर आने वाले दिनों में इन केंद्रों की संख्या बढ़कर 65 हो जाएगी।

वर्तमान में सभी जिलों में एक-एक तथा पटना में दो वन स्टॉप सेंटर केंद्र संचालित हैं। प्रत्येक केंद्र में 13 प्रशिक्षित कर्मियों की टीम मौजूद है, जो पीड़िता को आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, भोजन, कपड़े, मनो-सामाजिक व कानूनी परामर्श एवं अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रहें हैं। जानकारी के अनुसार, नए केंद्रों को जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर अनुमंडल मुख्यालयों पर स्थापित किया जा रहा है, ताकि दूर-दराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी आसानी से इन सेवाओं तक पहुंच सकें।

तीन वर्षों में 20 हजार से अधिक मामलों का सफल निष्पादन

पिछले तीन वर्षों में इन केन्द्रों पर कुल 23 हजार 585 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 20 हजार से अधिक मामलों का सफल निष्पादन किया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 7,517 मामलों में आए, जिनमें 6 हजार 599 का निपटारा किया गया। इसी तरह 2024-25 में आए 8 हजार 888 मामलों में 7 हजार 185 तथा मौजूदा वर्ष में 2025-26 जनवरी तक 7 हजार 180 मामलों में 6 हजार 322 का निपटारा किया जा चुका है।

हेल्पलाइन नंबर पर कर सकते शिकायत

कोई पीड़िता मदद के लिए वन स्टॉप सेंटर की हेल्पलाइन नंबर-181 पर फोन कर सकती हैं। इसके साथ ही त्वरित सहायता के लिए वन स्टॉप केन्द्रों को इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रणाली-112 से भी जोड़ा गया है। इन केन्द्रों पर पीड़ित महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण योजनाओं से भी जोड़ा गया है।

वन स्टॉप सेंटर: संरक्षण और पुनर्वास का केंद्र

वन स्टॉप केंद्र हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए एक समेकित सहायता तंत्र के रूप में सामने आया है, जहां उन्हें विभिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ता है। परामर्श के माध्यम से समस्या का समाधान न होने की स्थिति में विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर पीड़िता को राहत प्रदान की जाती है। समस्या के समाधान के पश्चात कम से कम छह माह तक पीड़िता की स्थिति की सतत निगरानी की जाती है। ताकि फिर से हिंसा की स्थिति उत्पन्न न हो।

Ali Ahmad

लेखक के बारे में : अली अहमद - चौपाल संदेश के संपादक है । 'चौपाल संदेश' के संपादक के रूप में जन-सरोकार, राजनीति और समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं सटीक पत्रकारिता का अनुभव। समाज के हर वर्ग से जुड़ी अहम ख़बरों और ज़मीनी मुद्दों को पाठकों तक पहुँचाना ही मुख्य ध्येय है। ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर निष्पक्ष विचार व सटीक ख़बरों के लिए प्रतिबद्ध।

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