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भोपाल। मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संचालन को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों के बीच सीधी जिले के कुसमी तहसील अंतर्गत भादौरा स्थित आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। NSUI ने गंभीर सवाल उठाए हैं। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया कि जिस कॉलेज के भवन और अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, उसी कॉलेज में GNM के 15 और B.Sc. Nursing के 7, कुल 22 विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए आवंटित किया गया है।

परमार ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि विद्यार्थियों के आवंटन से पहले कॉलेज का भौतिक सत्यापन किस अधिकारी या निरीक्षण दल ने किया? क्या निरीक्षण के दौरान भवन, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, आवश्यक उपकरण, फैकल्टी और क्लीनिकल प्रशिक्षण की सुविधाएं वास्तव में उपलब्ध थीं? यदि थीं तो उनका रिकॉर्ड कहां है और यदि नहीं थीं तो विद्यार्थियों को कॉलेज आवंटित करने का आधार क्या था?

रवि परमार ने कहा कि कॉलेज के संचालन और प्रबंधन में सीधी के भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनुप मिश्रा एवं बहू बीना मिश्रा सहित अन्य लोगों की भूमिका हैं। ऐसे में निर्माणाधीन भवन वाले कथित घोस्ट कॉलेज को मान्यता देने और फिर 22 विद्यार्थियों का आवंटन करने की पूरी प्रक्रिया जांच का विषय है।

परमार ने सवाल उठाया कि जब कॉलेज की वास्तविक स्थिति और आवश्यक सुविधाओं पर सवाल हैं, तो मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने 22 विद्यार्थियों को वहां प्रवेश के लिए आवंटित कैसे कर दिया? NSUI ने CBI से कॉलेज की मान्यता, भवन, फैकल्टी, दस्तावेजों और विद्यार्थियों के आवंटन के साथ-साथ सांसद परिवार से जुड़े लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।

रवि परमार ने कहा कि ऐसे कॉलेजों की वजह से ही मध्य प्रदेश के हजारों नर्सिंग छात्र छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है ना तो उनकी परीक्षाएं हो पा रही ना उनके परीक्षा परिणाम जारी हो पा रहे हैं उसके बावजूद सरकार ऐसे कॉलेजों को खोलकर दुबारा छात्र छात्राओं के भविष्य बर्बाद करने की साज़िश रच रही हैं ।‌

नर्सिंग काउंसिल के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

रवि परमार ने कहा कि मामला केवल कॉलेज संचालकों की भूमिका तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्ट्रार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है राजनीतिक रसूख के कारण यदि नियमों को दरकिनार कर विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगाया गया है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।