Spread the love

भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने आज केन-बेतवा लिंक परियोजना अंतर्गत छतरपुर ढोढन बांध कार्यस्थल पर आंदोलनरत विस्थापित आदिवासी एवं किसान परिवारों से मुलाकात कर उनका दर्द सुना और उनके संघर्ष को न्याय की लड़ाई बताया।

भारी पुलिस बंदोबस्त एवं प्रशासनिक रोक-टोक के बावजूद श्री पटवारी कांग्रेस नेताओं के साथ प्रभावित परिवारों तक पहुंचे। इस दौरान प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि उनके जंगल क्षेत्र में जाने से वन्यजीव प्रभावित होंगे। इस पर श्री पटवारी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जहां बड़े स्तर पर मशीनें, निर्माण कार्य और सैकड़ों मजदूर लगातार कार्य कर रहे हैं, वहां विपक्ष के नेताओं को पीड़ित आदिवासियों से मिलने से रोकना पूरी तरह अलोकतांत्रिक और तानाशाहीपूर्ण रवैया है।

श्री पटवारी ने कहा कि विस्थापित परिवारों की यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि उनके जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार प्रभावित परिवारों को न्याय देने में विफल रही है और उन्हें उचित मुआवजा एवं पुनर्वास नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने कहा कि संविधान और प्राकृतिक न्याय की भावना कहती है कि जिस परिवार की जमीन और जंगल छीने जाएं, उन्हें जमीन के बदले जमीन और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए। केवल कागजी मुआवजा देकर आदिवासी परिवारों का भविष्य सुरक्षित नहीं किया जा सकता।

श्री पटवारी ने कहा कि जब वे पीड़ित आदिवासियों से मिलने जा रहे थे, तब मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के निर्देश पर भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें रोकने का प्रयास किया गया। उन्होंने प्रशासन द्वारा दिए गए इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि उनके जाने से “बाघ, चीते और हाथी परेशान होंगे।”

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार जनता की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन कांग्रेस पार्टी आदिवासी, किसान और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी।