Chhattisgarh News, रायपुर। मनरेगा संशोधन का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बता दे की मनरेगा संशोधन को लेकर भाजपा महासचिव अरूण सिंह के पत्रकार वार्ता पर छत्तीसगढ़़ के कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने तंज कसते हुए कहा है कि “मोदी सरकार के श्रमिक विरोधी पाप छुपाने आये थे”।
मनरेगा के माध्यम से कांग्रेस की यूपीए सरकार ने देश के 12 करोड़ से अधिक मजदूरों को उनके ही गांव में रोजगार की कानूनी गारंटी दिया था। कोविड-19 के समय मनरेगा देश के लिए जीवनदायी योजना साबित हुई थी।
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मनरेगा के नये स्वरूप जी राम जी में मोदी सरकार ने केंद्रांश को घटाकर केंद्रांश और राज्यांश का औसत 60-40 कर दिया है। पहले यह योजना 100 प्रतिशत केंद्र पोषित योजना थी। जब केंद्र सरकार 100 प्रतिशत राशि देती थी तब तो राज्य सरकारें इस योजना को लागू करने में कोताही बरतती थी, अब जब राज्य को 40 प्रतिशत राशि वहन करना होगा तब तो राज्य सरकारें इसको लागू करने में और कोताही बरतेंगी। वैसे भी जब से देश में मोदी सरकार आयी है देश में मनरेगा मजदूरों को औसत 42 रोजगार दिवस ही काम मिल पाया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम से बदल देता है, जो मज़दूरों के लिए सिर्फ़ एक भरोसा है जिसे राज्य लागू करेंगे। जो कभी काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक योजना (एडमिनिस्ट्रेटिव मदद) में बदला लिया जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है। यह कोई सुधार नहीं है; यह गाँव के गरीबों के लिए एक संवैधानिक वादे को वापस लेना है।
शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गारंटी (मनरेगा) के रूप में रोजगार को कानूनी गारंटी दिया था लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा की साय सरकार का नाम बदलकर बंद करने की साजिश कर रही है। मोदी सरकार मनरेगा को बंद करना चाहती है। मोदी सरकार के 11 सालों में मनरेगा को पर्याप्त बजट नहीं दिया। हर साल मनरेगा के बजट में 30 से 35 प्रतिशत की कटौती की गयी है। पिछले 11 वर्षों में मनरेगा की मजदूरी में न्यूनतम वृद्धि है, जिसके कारण मजदूर वर्ग की आय स्थिर हो गयी है तथा महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है।