रायपुर। सरकार अफीम की खेती के गुनाहगारों को बचाने में लगी हुयी है ? प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने मंगलवार (7 अप्रैल) को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि दुर्ग जिले के समोदा में बहुचर्चित अवैध अफीम की खेती को मक्का बताने पर निलंबित की गईं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को जांच रिपोर्ट आए बिना ही सेवा में बहाल कर दिया गया। सरकार के रवैये से बेहद स्पष्ट है कि पूरे छत्तीसगढ़ में अवैध नशे की खेती भाजपा सरकार के संरक्षण में ही हो रहा है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि दुर्ग के समोदा में भाजपा नेता अफीम की खेती का कर्ताधर्ता था। अब तक ना तो भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को पार्टी से निष्कासित किया गया है और ना ही किसी अधिकारी कर्मचारी पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है, निलंबन कोई सजा नहीं फिर भी बहाली के लिए इतनी तत्परता क्यों? जांच रिपोर्ट का इंतजार तो किया गया होता? अब तो सरकार के रवैया से जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी प्रदेश की जनता को भरोसा नहीं रहा है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि कहा है कि पूरे प्रदेश में लगभग आधा दर्जन मामले अफीम की अवैध खेती के उजागर हुए, नगरी सिहावा में तो बिना मामला दर्ज किए ही सबूत ही नष्ट कर दिया गया। बलरामपुर और रायगढ़ जिले में दो-दो मामले पकड़े गए जिसमें भी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की संलिप्तता पाई गई, आज तक यह खुलासा नहीं हुआ कि जो अफ़ीम के फलों में चीरा लगाकर दूध निकाला गया था उसका चिट्ठा कहां-कहां तक पहुंचा? डिजिटल गिरदावली और इंच-इंच भुइंया नापने का दावा करने वाली सरकार में अफीम की फसल को कहीं पर अन्य अनाज, कहीं खरबूज या सब्जी, तो कहीं गेहूं मक्का बताया गया, जिम्मेदारों पर कार्रवाई के नाम पर मात्र एक कृषि विस्तार अधिकारी को निलंबित किया गया था, उसे भी तत्काल बहाल करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह सरकार नहीं चाहती की दोषियों पर कार्यवाही हो।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि सरकार के रवैये से बेहद स्पष्ट है कि पूरे छत्तीसगढ़ में अवैध नशे की खेती भाजपा सरकार के संरक्षण में ही हो रहा है। अब तक ना तो भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को पार्टी से निष्कासित किया गया है और ना ही किसी अधिकारी कर्मचारी पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है, निलंबन कोई सजा नहीं फिर भी बहाली के लिए इतनी तत्परता क्यों? जांच रिपोर्ट का इंतजार तो किया गया होता? अब तो सरकार के रवैया से जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी प्रदेश की जनता को भरोसा नहीं रहा है। सरकार दोषियों को संरक्षण दे रही है, ट्रैक्टर और बुलडोजर चलवा कर सबूत नष्ट करवाए गए, पूरे मामलों को दबाने का कुत्सित प्रयास सरकार के इशारे पर किया जा रहा है।