Report by – Ali Ahmad, रायपुर । छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी की तारीख घोषित नहीं किए जाने को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। रायपुर स्थित अपने निवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने धान खरीदी, पटवारियों की हड़ताल, महतारी वंदन योजना, पीएससी मुख्य परीक्षा और बीटीआई ग्राउंड में प्रस्तावित निर्माण परियोजना सहित कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने मांग की कि दीपावली से पहले धान खरीदी शुरू की जाए। यदि ऐसा संभव नहीं है, तो किसानों को अग्रिम भुगतान किया जाए।
धान खरीदी में देरी पर सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने कहा कि धान खरीदी की तारीख अब तक घोषित नहीं होने से किसानों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से खरीदी की तैयारियां भी जमीन पर नजर नहीं आ रही हैं। उनके मुताबिक, बारदानों की उपलब्धता और खरीदी केंद्रों की व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले राज्योत्सव के समय, यानी 1 नवंबर के आसपास धान खरीदी शुरू हो जाती थी, ताकि किसान त्योहार के लिए जरूरी खर्च कर सकें। उन्होंने कहा कि किसान धान बेचने के बाद ही दीपावली की तैयारी कर पाते हैं। इसलिए सरकार को त्योहार से पहले खरीदी शुरू करनी चाहिए।
बघेल ने इस वर्ष किसानों को 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा किया था। उनके अनुसार, पिछले दो वर्षों में समर्थन मूल्य में कुल 258 रुपये की वृद्धि को जोड़कर किसानों को 3,358 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जाना चाहिए।
चावल जमा करने के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने पिछले वर्ष के चावल को भारतीय खाद्य निगम (FCI) में जमा करने की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने राज्य सरकार के डीपीआर की वेबसाइट पर 25 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कुल 89 लाख टन चावल जमा करने का लक्ष्य था, जबकि 37.50 लाख टन चावल ही जमा हो पाया था। उनके मुताबिक, 51.50 लाख टन चावल जमा होना बाकी था।
उन्होंने दावा किया कि धान के उठाव में देरी और संग्रहण केंद्रों की स्थिति का असर आगामी खरीदी पर पड़ सकता है। बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार इसी वजह से धान खरीदी देर से शुरू करना चाहती है।
पटवारियों की हड़ताल से किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
पूर्व मुख्यमंत्री ने पटवारियों की हड़ताल को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि धान खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित है। ऐसे में पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों के राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करने और पंजीयन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
बघेल के अनुसार, फौती, नामांतरण, बंटवारा और रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार जैसे काम प्रभावित होने से किसानों को तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि समय पर रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होने पर कुछ किसान धान बेचने से वंचित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पटवारी नए पीवी ऐप यानी फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप में तकनीकी समस्याओं का विरोध कर रहे हैं। बघेल ने सरकार से मांग की कि पटवारियों की समस्याओं का समाधान जल्द निकाला जाए, ताकि धान खरीदी और किसान पंजीयन पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े।
महतारी वंदन योजना में वसूली को बताया अन्याय
महतारी वंदन योजना को लेकर भूपेश बघेल ने कहा कि जिन महिलाओं को अपात्र बताकर पहले दी गई राशि वापस मांगी जा रही है, उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय भाजपा ने विवाहित महिलाओं को योजना का लाभ देने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद पात्रता की शर्तें लागू की गईं।
उन्होंने बिजली बिलों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक ओर महिलाओं को योजना के तहत 1,000 रुपये दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली बिलों में बढ़ोतरी से परिवारों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
बघेल ने सरकार से महिलाओं के प्रति एहसान जताने के बजाय उनकी समस्याओं पर ध्यान देने की मांग की। उन्होंने योजना के लाभार्थियों की संख्या में कमी आने का भी दावा किया।
पीएससी मुख्य परीक्षा 2025 की उत्तरपुस्तिकाएं देने की मांग
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की मुख्य परीक्षा 2025 को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी अपनी उत्तरपुस्तिकाओं का अवलोकन करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें मूल्यांकन में गड़बड़ी की आशंका है।
बघेल ने आयोग से अभ्यर्थियों को उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उम्मीदवारों को अपने अंकों का मूल्यांकन समझने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य परीक्षा में 265 पदों के मुकाबले 795 अभ्यर्थियों का चयन साक्षात्कार के लिए होना चाहिए था, लेकिन आयोग ने 608 अभ्यर्थियों को ही योग्य माना। बघेल ने इस अंतर पर सवाल उठाते हुए आयोग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने पर भी चिंता जताई।
बीटीआई ग्राउंड में व्यावसायिक और आवासीय परियोजना का विरोध
रायपुर के बीटीआई ग्राउंड में प्रस्तावित व्यावसायिक और आवासीय परियोजना पर भूपेश बघेल ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राजधानी में खुले मैदान पहले से ही कम हैं और ऐसे में बचे हुए मैदानों पर निर्माण करना उचित नहीं है।
बघेल के मुताबिक, बीटीआई ग्राउंड का इस्तेमाल लोग सुबह-शाम सैर करने के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित रखने और शहर के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखने पर प्राथमिकता देनी चाहिए।
