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रायपुर : बाल विवाह मुक्त सूरजपुर की दिशा में जिला प्रशासन ने अक्षय तृतीया के  मुहूर्त पर एक महत्वपूर्ण सफलता अर्जित की है। कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन के निर्देश पर पूरे जिले में प्रशासनिक अमले का उड़नदस्ता दल अक्षय तृतीया पर होने वाले विवाहों पर सतत नजर बनाए हुए था, जिसके परिणामस्वरूप जिले में कुल 10 बाल विवाह समय रहते रोके गए।

बाल विवाह मुक्त सूरजपुर का संकल्प-
कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन ने बाल विवाह मुक्त सूरजपुर बनाने के उद्देश्य से जिले के समस्त विकासखण्डों में उड़नदस्ता दल गठित किए थे। अक्षय तृतीया के अवसर पर विवाहों की सघन जाँच के दौरान 10 स्थानों पर बाल विवाह होते पाए जाने पर परिजनों को समझाईश दी गई तथा विवाह रोकवाए गए। जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल इस दौरान सभी से संवाद कर यह सुनिश्चित करते रहे कि जिले में कहीं भी बाल विवाह न हो। जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल समस्त उड़नदस्ता दलों, परियोजना अधिकारियों, पर्यवेक्षकों, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड लाइन की टीम के साथ सक्रिय रहकर कार्यवाही का मार्गदर्शन करते रहे।

चार दिनों में चार विकासखण्डों में कार्यवाही-
अक्षय तृतीया के अवसर पर मात्र चार दिनों के भीतर विकासखण्ड रामानुजनगर से 02 बाल विवाह, विकासखण्ड भैयाथान से 04 बाल विवाह, विकासखण्ड प्रतापपुर से 02 बाल विवाह तथा विकासखण्ड ओडगी के बिहारपुर से 02 बाल विवाह रोके गए। रोके गए बाल विवाहों में 17 वर्षीय बालक एवं 14 वर्षीय बालिका भी शामिल हैं।
अभिभावकों को दी गई विधिक जानकारी-
समस्त प्रकरणों में बालिका एवं बालक के अभिभावकों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई ही नहीं, अपितु एक गंभीर अपराध भी है। अधिनियम के अंतर्गत बाल विवाह कराने वाले, करने वाले एवं सहयोग करने वाले सभी व्यक्तियों को 02 वर्ष की सजा एवं 01 लाख रुपये का जुर्माना अथवा दोनों से दण्डित किए जाने का प्रावधान है। परिजनों को यह संदेश भी दिया गया कि बालिका का विवाह तभी किया जाए जब वह अपने पैरों पर खड़ी हो जाए। सभी स्थानों पर विवाह रोकने का पंचनामा, कथन एवं शपथ पत्र लिया गया तथा स्पष्ट किया गया कि इसके पश्चात यदि विवाह संपन्न किया गया तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी, जिसकी समस्त जवाबदारी परिजनों की होगी।