Bihar News, पटना। राज्य के किसान सरसों में लाही कीट के प्रकोप से प्रभावित हो रहे हैं। लाही कीट पीला, हरा या काले भूरे रंग का मुलायम, पंखयुक्त या पंखहीन कीट होता है। इस कीट का वयस्क एवं शिशु कीट दोनों ही मुलायम पत्तियों, टहनियों, तनों, पुष्पक्रमों तथा फलियों से रस चुसते हैं,जिससे आक्रान्त होकर पत्तियां मुड़ जाती है। किसानों की इस समस्या को देखते हुए कृषि विभाग ने सरसों में कीट प्रबंधन के लिए सलाह जारी की है।
विभाग ने अपनी सलाह में कहा है कि, सरसों में लाही कीट से बचाव के लिए खेत में प्रति हेक्टेयर 10 पीला फन्दा का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही, नीम आधारित कीटनाशक एजाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम का 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए।
वहीं प्रकोप अधिक होने पर रासायनिक कीटनाशक के रूप में ऑक्सीडेमेटान मिथाइल 25 ईसी एक मिली प्रति लीटर पानी अथवा थायोमेथाक्साम 25 प्रतिशत डब्लूजी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल का 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
आरा मक्खी भी पहुंचाती है सरसों को नुकसान
आरा मक्खी वयस्क कीट नारंगी-पीले रंग तथा काले सिर वाले होते हैं। आरी के समान दिखने वाली इसकी मादा ओभिपोजिटर पत्तियों को काटकर क्षति पहुंचाती है। इसके प्रबंधन के लिए नीम आधारित कीटनाशक एजाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम का 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। वहीं, रासायनिक कीटनाशकों में डायमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी का 1 मिली प्रति लीटर पानी अथवा क्वीनलफॉस 25 प्रतिशत ईसी का 1.5 मिली की दर से पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव करने से फायदा होता है। विभाग द्वारा जारी इन सलाहों को मानकर किसान न सिर्फ सरसों को लाही कीट के प्रकोप से बचा सकते हैं बल्कि राज्य में तिलहन उत्पादन को बढ़ाने में भी अपना योगदान दे सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर के ट्रॉल फ्री नं 18001801551 पर या अपने जिला के सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण से सम्पर्क कर सकते हैं।