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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश जनजातियों का अपना घर है, जिस ट्राइबल स्टेट भी कहा जाता है। यह उपमा ही हमारे अस्तित्व का सबसे बड़ा अभिनंदन है। जनजातियां, हमारी मुकुट मणियां हैं, यह प्रत्येक मध्यप्रदेशवासी के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान की बात है। अबुआ दिशुम-अबुआ राज यानी हमारी धरती, हमारा राज। हमारी धरती और संस्कृति ही हमारी पहचान है और इसी पहचान का उत्सव हम सब आज बड़वानी में मना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस वह शंखनाद है, जिसने नई पीढ़ी को वीर जननायकों के बलिदान, शौर्य और साहस से परिचित कराया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को बड़वानी जिले की पानसेमल विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मोरतलाई में जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम मोरतलाई में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की भव्य आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण किया। साथ ही बड़वानी जिले के लिए 133 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 6 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 5 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इसमें 46 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार राजपुर से दवाना मार्ग का लोकार्पण और 14 करोड़ 86 लाख रूपए की लागत से सेंधवा में नवीन शासकीय महाविद्यालय भवन, बलवाड़ी का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर पानसेमल और बारला में उद्वहन सिंचाई परियोजना के विस्तार की घोषणा करते हुए कहा कि अब क्षेत्र के सभी 51 गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए जल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पानसेमल में रेस्टहाउस बनाने और यहीं पर अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) का कार्यालय (एसडीओपी आफिस) खोलने, टेमला में हायर सेकेंडरी स्कूल खोलने, मोरतलाई के मिडिल स्कूल को हायर सेकेंडरी स्कूल में प्रोन्नत करने एवं रायचूर में उपलब्ध हाई स्कूल को हायर सेकेंडरी स्कूल में प्रोन्नत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने रामगढ़ से सापखड़की तक पक्की रोड बनाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि विकास की बात पर हमें सबका साथ चाहिए। सबके साथ और सहयोग से ही प्रदेश को विकास की ऊंचाइयों तक लेकर जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे जनजातीय भाई-बहनों ने सदैव अपनी माटी और अपनी संस्कृति के लिए जी-जान एक किया है। राजा भभूत सिंह से लेकर रानी अवंतिबाई तक अनेक जनजातीय नायकों की कहानी हमें आश्चर्य से भर देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़वानी आते ही मन जनजातीय रंग में रंग गया है। मैं वीरों की भूमि बड़वानी की माटी से तिलक करता हूं, क्योंकि इस मिट्टी के कण-कण में रण है। यहां की मिट्टी ने भीमा नायक, खाज्या नायक और वीर बिरजू नायक जैसे अमर बलिदानियों को जन्म दिया। इन वीरों ने अपने पराक्रम से अंग्रेजों को छठी का दूध याद दिला दिया। इन सभी अमर सपूतों के चरणों में नमन है। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति, परम्पराओं और आप सभी भाइयों-बहनों की उपस्थिति ने ही इस कार्यक्रम को गरिमामय बनाया है। उन्होंने सभी को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस (15 नवम्बर) की अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती भव्य स्वरूप में मनाई जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 5 साल पहले जनजातीय नायकों को सम्मान देने की परंपरा की शुरुआत की। हमारे जनजातीय नायकों ने जनजाति अंचलों से स्वतंत्रता के लिए आवाज उठाई और भारत माता के जयकारे लगाते हुए अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई लड़ी। उन्होंने अंग्रेजों से कहा था कि ये धरती खाली करो… ये जल, जंगल और जमीन हमारी है। भारत 1947 में आजाद तो हो गया, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने समाज के नायकों को भुलाने का कार्य किया, खुद सत्ता के नशे में चूर हो गए। किसी भी जनजातीय नायक को कभी सम्मान नहीं दिया।