बिहार पटना : जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता डाॅ0 निहोरा प्रसाद यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर बिहार में पलायन को लेकर किए झूठे दावे पर जमकर निशाना साधा है। मीडिया में जारी बयान में उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव हमेशा बिहार में पलायन को लेकर झूठा आंकड़ा पेश करते हैं और उसे साबित करने की कोशिश करते हैं। लेकिन नेता प्रतिपक्ष को बिहार में पलायन की क्या स्थिति है इसको लेकर शायद सच्चाई नहीं मालूम है। तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि बिहार से अबतक 3 करोड़ मजदूरों ने पलायन किया है। यह बयान न सिर्फ तथ्यहीन है, बल्कि पूरी तरह से भ्रामक और जनता को गुमराह करने की कोशिश है।
राज्यसभा में 1 अगस्त 2024 को बिहार से मजदूरों के पलायन को लेकर पूछे एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री ने स्पष्ट रूप से बताया था कि 26 जुलाई 2024 तक देशभर में 29.83 करोड़ असंगठित श्रमिकों ने ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें से 2.9 करोड़ बिहार के हैं। यह आंकड़ा केवल प्रवासी मजदूरों का नहीं, बल्कि बिहार में रहकर काम करने वाले असंगठित मजदूरों को भी शामिल करता है, जैसे खेतिहर मजदूर, दिहाड़ी श्रमिक, घरेलू कामगार आदि।
ई-श्रम पोर्टल पर जो आंकड़ा सामने आया है, वह राज्य के भीतर और बाहर काम कर रहे असंगठित श्रमिकों की कुल संख्या को दर्शाता है, न कि केवल पलायन कर चुके मजदूरों की। इसलिए यह दावा करना कि 2.9 करोड़ मजदूरों ने बिहार छोड़ दिया है, सरासर गलत है। इसके अलावा, तेजस्वी यादव ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि 1.5 करोड़ अनरजिस्टर्ड मजदूर भी हैं। सवाल यह है कि इस आंकड़े का आधार क्या है? क्या उन्होंने कोई सर्वे कराया है? कोई रिपोर्ट जारी की है? यदि नहीं, तो यह दावा पूरी तरह से मनगढंत और झूठ पर आधारित है।
बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2023 में प्रकाशित जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट तेजस्वी यादव के इस झूठ का सबसे बड़ा खंडन करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार की कुल जनसंख्या 13 करोड़ 7 लाख से अधिक है, जिसमें से 12 करोड़ 32 लाख लोग स्थायी रूप से बिहार में ही निवास करते हैं। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि केवल 45 लाख 78 हजार लोग रोजगार के लिए बिहार से बाहर गए हैं, जो कि राज्य की कुल जनसंख्या का महज 3.5 प्रतिशत है। इन आंकड़ों को तेजस्वी यादव कैसे नकार सकते हैं, जबकि यह रिपोर्ट उनकी ही सरकार के कार्यकाल में 9 अक्टूबर 2023 को जारी की गई थी? जब वे जाति गणना का श्रेय लेते हैं, तो वो कैसे इन आंकड़ों को झुठला सकते हैं? क्या यह दोहरी राजनीति नहीं है?
उन्होंने कहा कि कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक जिम्मेदार विपक्ष का नेता ऐसे झूठे और बिना आधार के दावे कर रहा है, जो राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है। तेजस्वी यादव को चाहिए कि वे अपने इस झूठे बयान के लिए जनता से माफी मांगें और आगे से बिना प्रमाण के कोई भी आंकड़ा सार्वजनिक रूप से न दें।
झूठ की राजनीति अब नहीं चलेगी। जनता अब जागरूक है और वह सच्चाई और भ्रम में फर्क करना जानती है।