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मध्यप्रदेश, भोपाल : भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) के नर्सिंग हॉस्टल में घटिया भोजन और दूषित पानी के कारण हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। चार दिन पहले हॉस्टल की एक नर्सिंग छात्रा की तबीयत बिगड़ने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 4-5 छात्र-छात्राएं अब भी गंभीर रूप से बीमार हैं।

मंगलवार को एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार एवं जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव के कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और न्याय की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान मनीषा श्रीवास्तव ने छात्रों से वादा किया था कि 2 दिनों के भीतर हालात सुधारकर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आश्वासन देने के बाद स्वयं 3 दिन की छुट्टी लेकर वे अपने आकाओं की शरण में चली गईं।

पानी और भोजन की गुणवत्ता बहुत ज्यादा खराब

एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने बताया कि छात्रों ने खुद टीडीएस मीटर से हॉस्टल के पानी की जांच की, जिसमें 703 PPM का स्तर निकला। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित 300-600 PPM और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित 500 PPM से कहीं अधिक है। इस स्तर का पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है, फिर भी छात्र-छात्राओं को यही दूषित पानी पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

रवि परमार ने आरोप लगाया कि एक छात्रा की मौत और लगातार शिकायतों के बावजूद न तो भोजन की गुणवत्ता सुधारी गई और न ही पानी को शुद्ध किया गया। भोजन और पानी में कीड़े-मकोड़े पाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर मनीषा श्रीवास्तव का भोजन सप्लाई एजेंसी से इतना लगाव क्यों है कि इतनी गंभीर घटनाओं के बाद भी उसका टेंडर निरस्त नहीं किया गया। यह छात्रों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ है यह मामला सिर्फ एक हॉस्टल का नहीं बल्कि छात्र-छात्राओं के जीवन और स्वास्थ्य का है।

छात्र छात्राओं को धमकाया जा रहा

जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि हॉस्टल में साफ-सफाई का घोर अभाव है। काकरोच और कीड़े-मकोड़े हर जगह पाए जाते हैं। छात्राओं की शिकायतों पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है। मंगलवार को हुए प्रदर्शन के बाद उप प्राचार्य, प्रथम वर्ष की क्लास कोऑर्डिनेटर, वार्डन और फैकल्टी द्वारा छात्रों को धमकाया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों का सीधा उल्लंघन है।

अक्षय तोमर ने साफ चेतावनी दी कि यदि भारत सरकार और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ( ICMR ) द्वारा शीघ्र ही बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो एनएसयूआई छात्र-छात्राओं के साथ मिलकर भूख हड़ताल करने को बाध्य होगी।