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चौपाल संदेश, भोपाल । पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने मध्यप्रदेश में शासकीय संपत्ति के नियम विरुद्ध क्रय-विक्रय के गंभीर मामले को उठाते हुए बड़े पैमाने पर वित्तीय श अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि शासन की वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।

नियमों के विरुद्ध संपत्ति का विक्रय

विधानसभा में जयवर्द्धन सिंह के प्रश्न के माध्यम से यह तथ्य सामने आया कि के अधीन वन भवन की संपत्ति को अन्य शासकीय विभागों को लगभग 56 करोड़ रुपए में विक्रय किया गया। यह प्रक्रिया नियमों के विपरीत बताई जा रही है, क्योंकि सामान्यतः एक शासकीय विभाग द्वारा दूसरे शासकीय विभाग से संपत्ति के क्रय-विक्रय पर स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क में छूट का प्रावधान लागू होता है।

इसके बावजूद संबंधित संपत्तियों के पंजीयन में शासकीय विभागों से स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क दोनों की वसूली की गई, जिसके लिए करोड़ों रुपए के स्टाम्प खरीदे गए। इस प्रकार सरकारी धन का अनावश्यक और नियम विरुद्ध व्यय किया गया।

रजिस्ट्रियां निरस्त — लेकिन सवाल कायम

मामला उजागर होने और लगातार आपत्ति दर्ज कराने के बाद द्वारा संबंधित रजिस्ट्रियां निरस्त कर दी गईं।
हालांकि, सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिन विभागों द्वारा स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क के रूप में करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया, वह राशि एक निजी सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से के जरिए अदा की गई — जो गंभीर वित्तीय अनियमितता और संभावित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है।

अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में

इस पूरी प्रक्रिया में कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है —

– उप-पंजीयक द्वारा इतनी बड़ी प्रक्रिया में कथित लापरवाही के बावजूद रजिस्ट्री का संपादन किया जाना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
– वन विभाग के अधिकारी द्वारा विभाग के नाम के स्थान पर स्वयं के नाम से रजिस्ट्री कराए जाने की बात सामने आई है।
– जिन शासकीय विभागों ने रजिस्ट्री करवाई, उनके तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

कर भुगतान में भी गंभीर अनियमितता

मामले में यह भी सामने आया कि संपत्ति के इस क्रय-विक्रय में न तो जीएसटी का भुगतान किया गया और न ही अन्य करों का समुचित भुगतान किया गया, जो संभावित रूप से बड़े पैमाने पर कर चोरी की ओर संकेत करता है।

मध्यस्थता और निर्णय

संपत्ति के इस क्रय-विक्रय में द्वारा मध्यस्थता निभाई गई। विभाग ने विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया है कि मंत्री परिषद के निर्णय के बाद संबंधित रजिस्ट्रियां निरस्त की गई हैं।

उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

जयवर्द्धन सिंह ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराए जाने, दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने तथा सरकारी धन के दुरुपयोग की भरपाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में पारदर्शी जांच नहीं होती, तो यह शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करेगा।

सरकार से प्रमुख मांगें

1. दो शासकीय विभागों के बीच नियम विरुद्ध रजिस्ट्री करवाने के मामले में तत्कालीन उप-पंजीयक को तत्काल निलंबित किया जाए।
2. वन विभाग की ओर से विभाग के नाम के बजाय स्वयं के नाम पर रजिस्ट्री करवाने वाले अधिकारी को तत्काल निलंबित कर एफआईआर दर्ज की जाए।
3. निजी एजेंसी दिव्या नामदेव द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क का भुगतान कराने के मामले में एजेंसी का लाइसेंस निरस्त कर एफआईआर दर्ज की जाए।
4. पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

पारदर्शिता पर बड़ा सवाल

उन्होंने कहा कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो यह न केवल सरकारी संपत्ति प्रबंधन बल्कि वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा ।