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पटना। मुजफ्फरपुर जिले के कांटी स्थित राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र की 44 डिसमिल सरकारी जमीन को निजी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज करने के मामले में राज्स्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कांटी के अंचलाधिकारी को निलंबित कर दिया है।

इस संबंध में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र, कांटी की भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दाखिल–खारिज किया जाना अत्यंत गंभीर मामला है। सरकारी भूमि के साथ किसी भी प्रकार का खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में यह पाया गया कि नियमों की अनदेखी कर या न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए सरकारी भूमि को निजी नाम पर दर्ज किया गया है, तो जिम्मेदार पदाधिकारियों और लाभार्थियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई होगी। उपमुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार की भूमि किसी भी सूरत में हड़पी नहीं जा सकती और ऐसे मामलों में सरकार की नीति शून्य सहनशीलता की है।

विदित हो कि मुजफ्फरपुर जिले के कांटी स्थित राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र की 44 डिसमिल सरकारी जमीन को निजी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज किए जाने के मामले में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। स्वत्व वाद संख्या 303/2018 (नवीन कुमार बनाम राज्य सरकार) में दिसंबर 2023 में पारित आदेश के आलोक में अंचलाधिकारी, कांटी द्वारा राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र के नाम से दर्ज कुल 6 एकड़ जमीन में से 44 डिसमिल भूमि का दाखिल-खारिज निजी व्यक्ति के पक्ष में कर दिया गया।
नियमों के अनुसार इस प्रकरण में सर्वप्रथम विधिक मंतव्य प्राप्त कर सक्षम न्यायालय में अपील दायर किया जाना आवश्यक था, लेकिन अंचलाधिकारी, कांटी द्वारा ऐसा नहीं किया गया और सीधे सरकारी कृषि भूमि का दाखिल-खारिज कर दिया गया। इस मामले को गंभीर मानते हुए अपर समाहर्ता, मुजफ्फरपुर से जांच कराई गई। जिसमें अपर समाहर्ता, मुजफ्फरपुर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से यह प्रतिवेदित किया गया कि अंचलाधिकारी, कांटी ने विभागीय प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए कृषि विभाग की भूमि का दाखिल-खारिज निजी व्यक्ति के पक्ष में किया गया है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिलाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया था और कांटी के तत्कालीन अंचलाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। जांचोपरांत विभाग ने तत्कालीन अंचलाधिकारी को निलंबित कर दिया गया।

इधर, स्वत्व वाद संख्या 303/2018 में सब जज, मुजफ्फरपुर द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील दायर करने की प्रक्रिया भी तेज की गई। इस संबंध में पत्रांक 2626, दिनांक 02.09.2025 के माध्यम से प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना से पत्राचार कर ग्राउंड्स ऑफ अपील तैयार किए गए। इसके पश्चात् महाधिवक्ता ने विधिक मंतव्य देते हुए अविलंब अपील दायर करने की सलाह दी। महाधिवक्ता के मंतव्य के आलोक में जिला कृषि पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा प्रथम अपील उच्च न्यायालय में दायर की गई है। वर्तमान में यह फर्स्ट अपील उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

प्रशासनिक हलकों में इस पूरे मामले को सरकारी कृषि भूमि के संरक्षण से जुड़ा गंभीर प्रकरण माना जा रहा है, जिस पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।