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Sakti District News: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के किसानों के लिए राहत और लाभ का अवसर लेकर प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीसीएस) लागू की गई है। इसके तहत दलहन एवं तिलहन फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसी नेफेड के माध्यम से जिले की छह सहकारी समितियों रगजा, मालखरौदा, बेल्हाडीह, पिहरिद, जैजैपुर और कोटमी को अधिसूचित किया गया है। इन समितियों के आसपास के किसान अपनी दलहन और तिलहन फसलों को निर्धारित समर्थन मूल्य पर बेच सकते हैं, जिससे उन्हें उचित दाम मिलने की गारंटी मिलेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ लेने के लिए किसानों का पंजीयन एकीकृत किसान पोर्टल या ई-समृद्धि पोर्टल में कराना अनिवार्य है। पंजीयन की अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ सकें। इसके साथ ही किसानों के लिए यह भी जरूरी है कि उनकी फसल का रकबा संबंधित पोर्टल में दर्ज हो और गिरदावरी में दलहन या तिलहन फसल की प्रविष्टि हो। केवल उन्हीं किसानों से उपज की खरीदी की जाएगी जिनकी फसल और रकबा का सत्यापन पूर्ण होगा। जिन मामलों में रबी फसल की गिरदावरी या अन्य प्रक्रिया अपूर्ण है, वहां किसानों को राहत देते हुए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और पटवारी के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी प्रमाण पत्र को मान्य किया जाएगा। इस आधार पर फसल और रकबे का सत्यापन कर खरीदी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पंजीयन के लिए किसानों को आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका की फोटोकॉपी, बी-1 खसरा, फसल विवरण, बैंक पासबुक की प्रति तथा एग्रीस्टेक पंजीयन जैसे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

रबी विपणन वर्ष 2026-27 अंतर्गत चना के लिए अधिकतम सीमा 6.00 क्विंटल प्रति एकड़ एवं समर्थन मूल्य 5875.00 रुपये, सरसों के लिए अधिकतम सीमा 5.00 क्विंटल प्रति एकड़ एवं समर्थन मूल्य 6200.00 रुपये तथा मसूर के लिए अधिकतम सीमा 2.00 क्विंटल प्रति एकड़ एवं समर्थन मूल्य 7000.00 रुपये निर्धारित किया गया है। जिला प्रशासन ने जिले के सभी दलहन एवं तिलहन उत्पादक किसानों से अपील की है कि वे समय सीमा के भीतर पंजीयन कराकर योजना का अधिकतम लाभ उठाएं और अपनी उपज को सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर बेचकर आर्थिक लाभ प्राप्त करें। योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।