रायपुर/अजमेर। अजमेर शरीफ दरगाह में हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती (रह.) का 814वां उर्स मुबारक हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर दरगाह और आसपास के इलाकों में सूफियाना कलाम की गूंज सुनाई दे रही है। देश और विदेश से आने वाले हजारों जायरीन प्रतिदिन मखमली चादर पेश कर ख्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह पर अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं।
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त डॉ. सलीम राज ने शनिवार (27 दिसम्बर) को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ओर से दरगाह शरीफ में विशेष चादर पेश की। मुख्यमंत्री साय ने अपने प्रतिनिधि के रूप में डॉ. राज को मुख्यमंत्री निवास में यह चादर सौंपी थी। चादरपोशी के दौरान डॉ. राज ने छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की खुशहाली, अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी।

डॉ. सलीम राज ने इस अवसर पर कहा कि अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर पेश करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है। इसे श्रद्धा, सम्मान और मन्नत का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने बताया कि यह रस्म सूफी परंपरा का हिस्सा है और इसका उद्देश्य हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (रह.) के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करना होता है। उर्स के दौरान दरगाह पर विशेष चादर चढ़ाई जाती है, जो इस आयोजन का मुख्य हिस्सा होता है। इसे प्रेम और सम्मान की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है और इसमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं।
अजमेर शरीफ का उर्स केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। यहां हर वर्ग, हर धर्म और हर क्षेत्र से लोग शामिल होते हैं और ख्वाजा साहब की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं।