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MP News, भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजधानी भोपाल के गौरवशाली अतीत को निखारने के लिए सभी समन्वित आवश्यक प्रयास पूरी प्रतिबद्धता के साथ किए जाएंगे। महान प्रतापी राजा भोज के शासन के एक हजार साल पूर्ण होने पर भोज-नर्मदा द्वार का भूमि-पूजन किया गया था। राजधानी में महान चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के शासन के दो हजार साल पूर्ण होने पर उनके नाम पर बनने वाले द्वार का भूमि-पूजन किया जायेगा। भोपाल में महापुरूषों के नाम पर विभिन्न मार्गों पर 9 भव्य द्वार बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ये बात शनिवार को समत्व भवन में विधायक श्री रामेश्वर शर्मा और हुजूर विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में कही।

राजधानी में निर्मित होने वाले भव्य द्वार विभिन्न महापुरूषों और उनकी विरासत को प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम मुस्कुरा रहे हैं, काशी का भी आनंद उसमें जुड़ा है और महाकाल में महालोक छाया हुआ है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की है। आचार्य सांदीपनि का आश्रम मध्यप्रदेश की धरोहर है। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता, अमीर और गरीब की मित्रता का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। मध्यप्रदेश की धरती से सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का अद्भुत मॉडल सभी के लिए प्रस्तुत किया। आज सम्राट विक्रमादित्य सुशासन के लिए पूरे संसार में जाने जाते हैं। सम्राट अशोक और विश्व प्रसिद्ध धरोहर सांची को जीवंत करते द्वार बनाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में गौमाता का प्रमुख स्थान है। गाय स्वयं के बच्चों के साथ हम सभी का पोषण भी करती है, इसीलिए वह ‘माता’ के रूप में पूजी जाती है। वह अपने आंचल में ममता लिए सबका कल्याण करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौशाला का संचालन करने वालों को सरकार सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। गौमाता की रक्षा और सुरक्षा के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।गौपालन के लिए भी सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. अंबेडकर कामधेनु योजना प्रारंभ की है।