बिहार पटना: बिहार विधानसभा के कल हुए ( 6 नवम्बर 2025) पहले चरण के मतदान में मतदान प्रतिशत में उछाल सत्ता बदलाव का स्पष्ट संदेश है ?
राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि जो लोग बढे हुए मत प्रतिशत का आधार एस आई आर और महिला मतदाताओं के रुझान को बता रहे हैं, सही अर्थों में वे अंधेरे में तीर मार रहे हैं। यदि एस आई आर नहीं भी हुआ रहता और मतदाताओं की संख्या एस आई आर के पूर्व की तरह यदि 7. 89 करोड़ हीं रहता तो भी कल के मतदान का प्रतिशत जो 64.69 प्रतिशत है वह लगभग 62 प्रतिशत हो जाता, जो 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के मतदान प्रतिशत से लगभग 5 प्रतिशत ज्यादा है। पूर्व के अनुभवों के आधार पर हम यह दावे के साथ कह सकते हैं कि यह 5 प्रतिशत वोट बढना भी सत्ता में बदलाव के दृष्टिकोण से अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। इस बढे हुए मत प्रतिशत में सबसे बड़ा हिस्सा फर्स्ट टाइम वोटर और दूसरे राज्यों में काम करने वाले बिहारियों का है जो छठ पर्व के अवसर पर घर आए हुए हैं और जिनका रुझान सत्ता बदलने की है। यह बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत सत्ता में बदलाव का स्पष्ट संदेश है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि जो लोग महिलाओं के वोट प्रतिशत बढ़ने का दावा कर रहे हैं, वे या तो आंकड़े को झूठला रहे हैं या प्रयोजित तरीके से एक नैरेटिव गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। वास्तविकता तो यही है कि जिस अनुपात में महिलाओं का वोट बढ़ा है उसी अनुपात में उनका वोट प्रतिशत भी बढ़ा है। अन्यथा जिन महिलाओं ने कल मतदान किया है वे पहले के चुनावों में भी मतदान करती रही हैं।
श्री गगन ने कहा कि किसी को भ्रम में नहीं रहना चाहिए। कल प्रथम चरण के मतदान में इंडिया गठबंधन कम से कम 80 से 85 सीटों पर जीत हासिल करेगी। 11 नवम्बर को होने वाले दूसरे चरण के चुनाव में इंडिया गठबंधन और भी ज्यादा बेहतर करेगी। कल हुए प्रथम चरण के मतदान में वर्तमान सरकार के अधिकांश मंत्री चुनाव हारने की स्थिति में हैं। इस बार एनडीए का कोई भी हथकंडा काम आने वाला नहीं है और बिहार की जनता सत्ता बदलाव के साथ हीं एक बार तेजस्वी यादव को मौका देने का मन बना चुकी है।