बिहार, पटना। बिहार कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष राजेश राठौड़ ने रविवार (14 सितंबर) को एनडीए सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 सितंबर 2025 को प्रस्तावित पूर्णिया दौरे के लिए की जा रही व्यवस्था की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “यह क्या नौटंकी है? बिहार सरकार 200 बसों में जीविका दीदियों को सभा स्थल तक ले जाने और वापस लाने के लिए शिक्षकों को जबरन कंडक्टर बनने पर मजबूर कर रहे हैं। शिक्षक, जो बच्चों का भविष्य संवारते हैं, उन्हें अब भीड़ जुटाने और टिकट चेक करने का ठेका दिया जा रहा है। यह बिहार के शिक्षा तंत्र का खुलेआम मखौल है।”
राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा, लगता है एनडीए का ‘विकसित बिहार’ का सपना यही है – स्कूलों को ताला लगाओ, शिक्षकों को बस की खिड़की पर बिठाओ, और बच्चों को सड़कों पर छोड़ दो! अगर यही सुशासन है, तो बिहार की जनता को ऐसी तरक्की की जरूरत नहीं। पहले शिक्षकों को वेतन के लिए तरसाया, अब उनकी गरिमा को रैली की बसों में कुचलने की साजिश – यही है बीजेपी का असली चेहरा।
अब शिक्षकों को जबरन रैली में ढकेलकर क्या साबित करना चाहते हैं? कि बिहार में घोटालों की फेहरिस्त में शिक्षा का दुरुपयोग भी जुड़ जाए? एक तरफ हिंदू-मुस्लिम की बातें करके वोट की खेती, दूसरी तरफ शिक्षकों को कंडक्टर बनाकर लोकतंत्र का मजाक – यह है एनडीए का डबल ड्रामा।
“एक वक्त था जब चोर शरीफों को खदेड़ते थे, अब शरीफ शिक्षकों को रैलियों में खदेड़ने की तैयारी है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा का एसआईआर ठीक नहीं हो सकता, दो वोटर ID के साथ 420 का खेल चला रहे हैं, और ऊपर से रुपया गिरा रे… महंगाई का बोझ और रैलियों का यह तमाशा – यही है मोदी सरकार का ‘अच्छे दिन’ का नमूना! ‘वोट चोर दस्ता’ तो तैयार है, लेकिन जनता अब इनके फ्लॉप बंद और फ्लॉप साजिशों को नाकाम कर देगी।”
उन्होंने बिहार की जनता से अपील की, “राहुल गांधी जी की वोटर अधिकार यात्रा में जनता का सैलाब देखकर ये घबरा गए हैं। कांग्रेस मुख्यालय पर हमले करवाए, अब शिक्षकों को जबरन रैली में ढकेलने की साजिश रची जा रही है। बिहार की जनता, इस तानाशाही के खिलाफ खड़े हो जाइए। कांग्रेस पार्टी शिक्षकों के सम्मान और शिक्षा के अधिकार के लिए हमेशा लड़ेगी। आगामी चुनाव में इस ‘जबरन कंडक्टर’ संस्कृति को जड़ से उखाड़ फेंकिए। जय बिहार, जय हिंद!”