नईदिल्ली : राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने मंगलवार को ‘संविधान दिवस’ के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने संविधान को अंगीकृत करने की 75वीं वर्षगांठ पर देशवासियों से आग्रह किया कि वे संवैधानिक आदर्शों को अपने व्यवहार में अपनाएं और अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करें और 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम करें।
भारतीय संविधान एक जीवंत और प्रगतिशील दस्तावेज
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय संविधान का उल्लेख एक जीवित और प्रगतिशील दस्तावेज के रूप में किया है। इसके जरिये देश ने सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लक्ष्यों को हासिल किया है। संविधान दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के सेन्ट्रल हॉल ऑफ संविधान सदन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार ने समाज के सभी वर्गों विशेषकर कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए हाल के वर्षों में कई उपाय किये हैं।
उन्होंने कहा कि गरीबों को अपने मकान मिल रहे हैं और देश में विश्व स्तरीय अवसंरचना विकसित की जा रही है। राष्ट्रपति ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किये जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम ने महिला शक्तिकरण के नए युग को सृजित किया है।